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जय मिथिला जय मैथिली

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रविवार, 8 फ़रवरी 2015

गजल

चाही आश नै कनिको चमत्कारकेँ
मेहनतसँ बसायब अपन संसारकेँ

आजुक नवयुवक हम डरब धमकीसँ नै
छोरब नै अपन कनिको तँ अधिकारकेँ

बुझि अप्पन कियो छनमे करेजा ल' लिअ
टेढ़ीमे जँ छी नै सहब सरकारकेँ

धरतीपर जते बासन पकल काँच छै
एक्के हाथ सगरो गढ़ल कुम्हारकेँ

सहलों चोट सय भरि जन्म सोनारकेँ
'मनु'  के सहत एक्को चोट लोहारकेँ

(बहरे कबीर, मात्रा क्रम; २२२१-२२२१-२२१२)
जगदानन्द झा 'मनु'

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