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जय मिथिला जय मैथिली

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शुक्रवार, 23 मई 2014

गरीबी


गरीबी की छैक
सभसँ बड़का ब्याधि
सभसँ बड़का व्यथा
सभसँ बड़का छूत छै
एहि द्वारे तँ भगै छै
गरीबसँ ई सभ्य समाज
किएक तँ
सभसँ बड़का अभिशाप ई छै

गरीब झपटै छैक
भोजक पातपर गिद्ध जकाँ
जखन की मनुक्खकेँ तँ नहि
भगवान बनोलनि गिद्ध जकाँ
कोनो गामक चौक
वा सिमरिया घाट
सगरो भेट जाएत दू चारिटा
गरीब झपटैत गिद्ध जकाँ

आजुक नीति इहे छैक
गरीबकेँ मेटाउ
गरीबी मिट जाएत जल्दी
एहि द्वारे गरीबीसँ भागू
जेना हुए जतएसँ हुए
गरीबी मेटाउ अपन अपन जल्दी
नहि तँ गरीबीकेँ मिटाबै लेल सरकार
गरीब
अर्थात ‘मनु’केँ मिटा देत जल्दी जल्दी।
©जगदानन्द झा ‘मनु’  

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