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शनिवार, 19 अप्रैल 2014

८१म' सगर राति दीप जरए, कथा गोष्ठीक आयोजक, मैथिलीक श्रेष्ठ आ स्थापित गजलकार, कथाकार श्री ओम प्रकाश झा जीसँ भेटवार्ता


सभार : मिथिलांचल टुडे पत्रिका  
८१ म सगर राति दीप जरए, कथा गोष्ठीक आयोजक, मैथिलीक श्रेष्ठ आ स्थापित गजलकार, कथाकार श्री ओम प्रकाश झाजीसँ मिथिलांचल टुडेक विशेष संवाददाता जगदानन्द झा ’मनु’क ओनलाइन भेटवार्ता।
मनु प्रणाम ! आ संगे संग मिथिलांचल टुडे परिवार दिससँ बधाइ आ साधूवाद जे अपने मैथिली साहित्यक विकासमे नित्य नव-नव डेग लए आगू बढ़ि रहल छी।
ओम प्रकाशजी, प्रणाम ! बिना अपने सभक समर्थन आ सहयोगकेँ कोनो डेग बढ़ेनाइ सम्भब नहि अछि
मनु, मिथिलांचल टुडेक मार्फत मैथिलीक सुधि पाठक अपनेसँ सगर राति दीप जरए कखन आ किनका द्वारा शुरू कएल गेल से जानैक इक्षा रखैत अछि
ओम प्रकाशजी, ई आयोजन स्व० प्रभाष चन्द्र चौधरीजी द्वारा लगभग दू दशक पूर्व शुरू कएल गेल छल । ऐ आयोजनमे हुनक संग जीवकांत आ अन्य कथाकार लोकनि छलाह जे मैथिली कथा साहित्यकेँ नव दिशा देबामे सफल भेल छलाह
मनु, कोना आ कतेक समय बाद एकर आयोजन होइत छैक ?
ओम प्रकाशजी, साधारणतः तीन मासपर एकर आयोजन होइत छैक आ एकर निर्णय आयोजनक दौरान भऽ जाइत छैक जे अगिला आयोजन कतय हएत
मनु, एहि आयोजनक खर्चा, व्यक्तिगत रूपे किनको द्वारा, कोनो सरकारी वा गैरसरकारी संस्था द्वारा, कोना होइत अछि ?
ओम प्रकाशजी, एकर खर्चा आयोजक दिससँ कएल जाइत छैक। कोनो सरकारी वा गैर सरकारी संस्थासँ खर्चा लेबाक रेबाज नै छै। सम्पूर्ण रुपे खर्चा आयोजक करैत छथि
मनु, पटना वा आन कोनो मैथिली अकादमीसँ कतेक सहयोग भेटरहल छैक ?
ओम प्रकाशजी, कोनो वितीय आ आन सहायता नै भेट रहल छैक आ नै कोनो वितीय सहयोग लेबाक अपेक्षा अछि। किएक तँ परिपाटीक मोताबीक खर्चा आयोजककेँ करऽ पड़ैत छैक।
मनु, एहिमे सम्लित सम्माननीय कथाकार लोकनिकेँ आमन्त्रण वा कोनो सूचना देल जाइ छनि की ओ सभ अपने अबैत छथि ?
ओम प्रकाशजी, इंटरनेट, दूरभाष आ पत्रक माध्यमे लोककेँ सूचना पठाओल गेल छन्हि। ओना ऐ आयोजनमे बिना सूचनाक सम्मिलित भेनाई वर्जित नै छैक किएक तँ पछिला आयोजनमे सार्वजनिक हकार दऽ देल जाइत छैक
मनु, की एहिमे कोनो कथाकार आबि सकैत छथि अथवा कोनो योग्यता वा मापदण्डक निर्धारण छैक ?
ओम प्रकाशजी, कोनो कथाकार आबि सकैत छथि, कोनो योग्यता वा मापदण्ड नै निर्धारित छैक
मनु, की ई मानल जेए जे सगर राति दीप जरए कथा गोष्टीसँ नव-नव कथाकार सभकेँ हुनका अपन लेखनीमे निखारैक अबसर आ अपनाकेँ दुनीयाँक सामने आनैमे मददगार साबित भऽ रहल अछि ?
ओम प्रकाशजी, हाँ, ई गप्प अपने बेस कहल, ऐ आयोजनक मार्फत ढेर रास नव-नव कथाकार सोझाँ आबि रहल छथि। प्रत्येक आयोजनमे कोनो नै कोनो नव कथाकार चमत्कारी रुपे कथा साहित्यकेँ भेटिए जाइत छैक। तैँ ई कहलामे कोनो हर्ज नै जे ई आयोजन नव कथाकार सभकेँ दुनियाँक सोझाँ आनबामे मददगार साबित भऽ रहल अछि
मनु, आइ काल्हि मैथिली साहित्यमे गुटबाजीक प्रचलन बहुत बढ़ि गेल अछि। बहुत रास लोग एहन-एहन नीक आयोजन सभकेँ अपन स्वार्थ कारणे असफल करैक चेष्टामे लागल रहैत अछि, की एहन तरहक समस्याक सामना अहुँ सभकेँ करए परेत अछि ?
ओम प्रकाशजी, देखियौ, गुटबाजी जँ प्रगतिशील समाजक निर्माण हेतु होइत छैक तँ कोनो हर्ज नै मुदा समाजकेँ पाछाँ ढकेलबाक प्रयास करएबला गुटबाजी अहितगर होइत छैक। हमरा ऐ गुटबाजीसँ कोनो असुबिधा नै भेल अछि आ नै हएत किएक तँ समाजक आशीर्वाद हमरा संग अछि।
मनु, एहि तरहक गुटबाजी साहित्य विशेष कए मैथिली साहित्य लेल कतेक अहितगर अछि?  
ओम प्रकाशजी, साहित्यक मुख्य काज भाषाक संग समाजक प्रगति सेहो अछि। जँ गुटबाजी प्रगतिशील समाज आ साहित्य बनेबामे सहायक होइत छैक तहन तँ गुटबाजी कोनो अहितगर नै छैक। मुदा समाज वा साहित्यकेँ पाछाँ ढकलै बला गुटबाजी हरदम खराप ओइत छैक।
मनु, ई ८०-८१ कि मामला अछि ?
ओम प्रकाशजी, ई ८०-८१ आयोजनक संख्या बतबै छैक। हमरसँ पूर्व निर्मलीमे श्री उमेश मंडल जीक द्वारा ८० म कथा गोष्ठीक आयोजन भेल छल। हम ८१ म कथा गोष्ठीक आयोजन देवघरमे कऽ रहल छी।
मनु, अपनेसँ गप्प कए कऽ बड्ड नीक लागल। माँ भगवतीसँ एकर सफल आयोजनक कामना करैत, अन्तमे अहाँक मिथिलांचल टुडेक द्वारा नव रचनाकार अथवा कथाकारकेँ लेल कोनो मार्गदर्शन वा सुझाव।

ओम प्रकाशजी, धन्यवाद ! नव रचनाकार आ कथाकारकेँ ई धेआनमे राखबाक चाही जे साहित्य समाजक ऐना होइत छैक तैँ समाजक समस्या साहित्यक केंद्रमे रखबाक कोशिश करबाक चाही। समाजकेँ प्रगतिशील बाटपर चलेनाई सेहो नव साहित्यकारक संग सभ साहित्कारक धर्म अछि। प्रगतिशील समाज आ साहित्यक निर्माण साहित्यकारक सफलताक निशानी थिक। हमर शुभकामना सब नव साहित्यकारक संग अछि आ हम कामना करैत छी जे कलमक ई सिपाही लोकनि प्रगतिशील समाजक निर्माण करबामे सफल हेता।              

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