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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 24 सितंबर 2013

जखन ओ मन पड़य छथि

हँसेति छी जेखन ओ मन पड़य छथि 
कानैति छी जेखन ओ मन पड़य छथि

बितलाहा दिन आबि जायक्मअ अछि सोझा 
बहुत ओ जेखन मन पड़य छथि


बहुत बेरि कोशिश कएलौं बिसरि जाई हुनका
कोशिश करी कोना ओ मन पड़य छथि

दूर होई के बादो ओ कतेक लग में छथि
जखन तखन हरदम ओ मन पड़य छथि

हुनका सौं कतेक प्रेम अछि से जानी
साँस लेईके संग ओ मन पड़य छथि

सब राति सपना में देखय छी हुनका
कियैक त सबदिन ओ मन पड़य छथि

असगर में कखनो कखनो हँसी आबेति अछि
कुनु कुनु बात हुनकर मन पड़य छथि

हुनका सॅ दूर छी 1200 किलोमीटर लगभग
तहियो लग में छी सदिखन ओ मन पड़य छथि

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