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गुरुवार, 22 अगस्त 2013

सेल्समेन


गामक दलानपर नून तेलक दुकान चलेनाहर, साहजी अपन मुस्काइत मुँह आ शांत स्वभावकेँ कारण गाम भरिमे सभक सिनेहगर बनल मुदा किछु गोटे हुनकर एहि स्वभाबकेँ कारणे हुनका हँसीक पात्र बनोने। आइ साहजी अपने किछु काजसँ बाध दिस गेल। दुकानपर हुनकर १४ बर्खक बेटा समान दैत-लैत। एकटा बिस्कुट चकलेटक सेल्समेन साइकिल ठार करैत साहजीक बेटासँ, की रौ बौआ तोहर पगला बाबू कतए गेलखुन्ह।
साहजीक बेटा सेल्समेनक मुँह दिस कनी काल देखला बाद, किएक, की बात?
बात की समान देबैकेँ अछि, पुरनका पाइ लेबैक अछि।
किछु नहि लेबैकेँ अछि (भीतरसँ समान सभ उठा कए दैत) ई अपन पहिलका समान सभ नेने जाऊ  
किएक ! पहिलका तँ रखने रहु
नहि अहाँसँ किछु नहि चाही आ हाँ आगूसँ कहियो हमर दुकानपर नहि आएब
सेल्समेन मुँह बोनेए बकर-बकर ओइ नेना दिस देखैत अपन पुरनका समान सभ समटैमे लागल। ताबतमे साहजी सेहो आबि गेलाह।
सहजी सेल्समेनसँ, की यौ मालिक एना सभटा समान किएक समटने जाइ छी।  
हम कहाँ समटने जाइ छी अहाँक नेनकीरबा सभटा समान उठा कए दैत कहलथि एहिठाम कहियो नहि आएब।
किएक अहाँ की कहि देलिऐ ?
हम तँ किछु नहि कहलिएन्हि
नहि किछु तँ कहने हेबे
हाँ अबैत माँतर पूछने रहिएन्हि, की रौ बौआ तोहर पगला बाबू कतए गेलखुन्ह।
साहजी हँसैत, हा हा हा, हमरा संगे जे हँसी ठठ्ठा करै छी से ठीक मुदा केकरो सामने ओकर बापकेँ पागल कहबै तँ ओ कोना सहत, जेकरा की ओ अपन भगवान बुझै छै। एखन भोरे भोर दिमाग शांत रहै तेँ चूपेचाप समानेटा आपस कए कऽ रहि गेल नहि तँ एहन तरहक गप्पपर बेटखारा उठा कए मारि दैतेए।  

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