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जय मिथिला जय मैथिली

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गुरुवार, 4 जुलाई 2013

हमर मुइला बाद



हमर मुइला बाद..... जँ हम जंगल वा कोनो प्राकृतिक आपदामे मरी तँ, जंगलक जानवर अथवा चील कौआकेँ छूट जे हमर देहकेँ नोचि नोचि कए खा जए... मुदा प्राथना जे हमर आँखिकेँ छोरि दए। दुख हमर आँखिक नहि, हमर आँखिमे बसल हमर प्रीतमक छबी खराप होबैकेँ अछि। जँ हम सड़क दुर्घटनामे मरी तँ, एहि देहके आगिकेँ समर्पित करैसँ पहिने हमर आँखिकेँ कोनो खगल नेनाकेँ दान कए देल जाए, कारण हम नहि तँ हमर आँखि;.... नम्हर उम्र धरि प्रीतमकेँ ताकैत रहे। आ जँ हम वयोवृद्ध भए कऽ मरी, प्रीतमसँ पहिने तँ प्रीतमक घरक पाछू हमर सारा बने, आ प्रीतमक बाद तँ हमर सारा हमर प्रीतमक सारा संगे बने।

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