नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

बुधवार, 5 जून 2013

साक्षर


- रौ बिदेसरा, काल्हि सब बापुत आबि जैहें ।
- से किएक मालिक ?
- काल्हि बाबूक बरखी छै ।भोज-भात हेतै ।पात तँ तुँही सब उठेबहीं ने ?
- हम किए उठेबै? अपनेसँ उठा लेब अहाँ ।
- रौ, तोहर बापे-बाबा करैत एलौ ।छोट जातिक तँ ई काजे छै ।
- मालिक, अहाँ ककरा छोट कहैत छी ?बाप-बाबा कऽ एलाह हम सब नै करब ।
- एना जुनि बाज ।काज तँ पूजा होइत छौ ।कर्म कर ।
- यौ मालिक, आब हमहूँ सब बुझि गेलियै जे कोन काज हमर हितमे अछि ।आब हमहूँ सब साक्षर भऽ गेलियै ।डाकडर-इन्जिनियर बनि टाका छापब ।पात नै उठाएब ।

अमित मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें