नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शुक्रवार, 24 मई 2013

धर्म

विहनि कथा-29
* धर्म *

सकीना अपन पति रहमाक संग बड सुन्दरसँ जिनगी काटि रहल छलीह ।एक दिन रहमान बड प्रेमसँ एकटा कथा सकीनाकें सुनबैत छल ।ओहि कथामे एक ठाम तीन बेर तलाक . . .तलाक . . .तलाक लिखल छल ।रहमान एकरो पढ़ि देलक ।ओकर सबटा बात अब्बा सुनैत छलै ।ओ रहमान लऽग आबि बिगड़ैत बाजल "ई की कऽ देलें ?आब तोहर तलाक मान्य भऽ गेलौ ।"
आब मियाँ-बीबीपर पहाड़ खसि पड़लै ।रहमान कतबो मनेलक जे ओकरा तलाकक कोनो जरूरति नै छै ।ई प्रेमे छल ।मुदा धर्म मानै लेल तैयार नै भेलै ।आब सकीना आन पुरूषसँ निकाह कऽ, तीन मास काटि ,ओकरासँ तलाक लेलाक बादे रहमानसँ निकाह कऽ सकतै ।टोलक लोक सकीनाकें घरसँ निकालि देलकै ।रहमान आ सकीनाक नोर पूछि रहल छल जे एहन धर्म बनाएले किए गेलै जे प्रेमो नै बुझै छै ?

*हम किनको ठेस नै पहुँचाबऽ चाहै छी आ नै कोनो धर्मपर कटाक्ष करै छी ।ई कथाकें मात्र मनोरंजनक नजरिसँ देखल जाए । *
अमित मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें