नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

सोमवार, 6 मई 2013

गारेन्टी

सुजीतजी मोटर साइकिल ड्राइव करैत पाँछा प्रशांत जीकेँ बैसोने | मिशर जीक दलानपर रुक्ला | आँगा-आँगा सुजीतजी हुनक पाछू प्रशांतजी, मिशरजी लग जा सुमितजी, “नमस्कार मिशरजी, हम कहने रही ने आयुर्वेदसँ समंधित, माँजीक गठियाक दवाइ | हिनकासँ मिलु ई प्रशांतजी, हमर सीनियर छथि | अपनेक सभ गप्पक उचीत उत्तर देता |”

मिशरजी, “नमस्कार- नमस्कार (कुर्सी दिस इशारा कए) बैसल जाउ |”
तीनु गोटा कुर्सी ग्रहण कएला, तदुपरांत मिशरजी, “हाँ कहियौ |”
प्रशांतजी, “हम एकगोट आयुर्वेदिक कम्पनीसँ जुड़ल छी आ हमरा सभ लग किछु असाध्य रोग जेना मधुमेह, गठिया, बी०पी०, हार्ड प्रोब्लेम आदिक सफल उपचार अछि | सुजीत भाइसँ ज्ञात भेल अपनेक माए गठिया---“
मिशरजी, प्रशांत जीक गप्प बिच्चेमे रोकैत, “हाँ, से सभ ठीके पहिले कहु गारेन्टी छैक |”
प्रशांतजी, “गारेन्टी ! गारेन्टी कोना कहु मुदा ठीक होबाक सए टका विस्वास छैक |”
मिशरजी, “हाँ इहे, जखन गारेन्टीए नहि तखन हम अपनेक गप्प कोना मानव |”
प्रशांतजी, “सुनू-सुनू, हमर सभक पद्धति सुनला वाद अहाँ अपनो बुझबै आ मानबै जे गठियाक उपचार संभव छैक |”
मिशरजी, “कोना मानू, अपने गएरेन्टी देबै तहन ने मानब | आइ बिस बरखसँ कोनो डॉक्टर कोनो अस्पतालसँ ठीक नहि भेलै, अहुँ गारेन्टी नहि लए रहल छी आ अहीँ की दुनियाँक कोनो डॉक्टर गारेन्टी नहि लएत तखन कोना मानू |”
प्रशांतजी, “देखू ई गप्प ठीके अछि जे दुनियाँक कोनो डॉक्टर गारेन्टी नहि लेत किएक तँ दुनियाँक कोनो डॉक्टर लग एकर इलाह नहि छैक | गठिया की भेलै ?....  अपन ठेहुनक दुनू हड्डीकेँ जोड़क बीचमे एकटा माँसुक टुकड़ा होएय छैक जेकरा कार्टिलेज कहल जाइ छैक आ ओहि कार्टिलेजकेँ ठीक आ तन्दुरुस्त राखैक लेल, हम जे भोजन खाए छी ओहि भोजनसँ एकटा ग्रीस जकाँ चिपचिपा पदार्थ निकलै छैक जेकरा साइनोवियस फ्लूड कहल जाइ छैक | भोजनमे पोष्टिक तत्वक कमी, प्रदुषण, बएसकेँ बेसी भेलासँ, आन आन कतेको कारणे अपन देहमे साइनोवियस फ्लूड बननाइ बन भए जाइ छै | जखने साइनोवियस फ्लूड अर्थात चिपचिपा पदार्थ ग्रीस खत्म भेल तखने दुनू हड्डीक बिचमे दबा पिचा कए मासुक टुकड़ा अर्थात कार्टिलेज कइट जाइ छैक | दुनू हड्डीक बिचमे गएप भए जाइ छैक आ दुनू हड्डीमे हड्डी घसेलासँ असहाय दर्द होइत छैक | कतेक गोटेकेँ तँ चलला उत्तर हड्डीमे हड्डी घसेलासँ आवाज सेहो होइत छै | आब देखियौ एहिठाम डॉक्टर कहैत अछि जे साइनोवियस फ्लूड अर्थात चिपचिपा पधार्थ ग्रीस बननाइ बंद तँ बंद एकर कोनो इलाज नहि, बेसीसँ बेसी जीवन भरि दर्द निवारक गोटी खाए कए दर्दसँ बँचि सकै छी | बेसी दर्द निवारक दवाई खेलासँ हार्ड आ किडनीपर से खराबअसर | आब देखियौ, हमरा सभ लग अछि समुद्री जड़ी बूटीसँ निर्मित -------, आ जिनक शरीरमे एक्को आना साइनोवियस फ्लूड बचल अछि एकर नियमित सेवन कएला बाद हुनक शरीरमे ई साइनोवियस फ्लूड बनेनाइ शुरू करत आ जखने साइनोवियस फ्लूड बननाइ शुरू होएत, मासुक टुकड़ा अर्थात कार्टिलेज पुनः मरम्मत भेनाइ आरम्भ भए जाएत | शरीरमे वर्तमान साइनोवियस फ्लूडकेँ उपस्थित मात्राक हिसाबे ६ महिनासँ एक सबा बरखक अधिकतम सेवन कएला बाद कोनो व्यक्ति अपन पएरपर चलएटा नहि दौड़ए लगता |”
एतेक बड़का गठियापर व्याख्यान सुनि मिशरजी चुप्प, चुप्पी तोरैत, “हूँ ! सभ ठीक मुदा गारेन्टी....”
प्रशांतजी, “अच्छा लिअ हम अहाँक माए केर ठीक होबैक गारेन्टी लै छी, अहाँक माए हमर माए | अहाँ एक सबा बरख हमर दवाइ दियौन, ठीक नहि भेली तँ पाइ वापिस |”
आब तँ मिशरजीक बोल बन, जेबीसँ मोबाईल निकाइल बामे हाथे कएकटा न० लगेला बाद, “यौ सभ ठीक, आब तँ अहाँ गारेन्टीयो लए लेलहुँ मुदा एखन हमर छोटका भाइ फोन नहि उठा रहल अछि बादमे ओकरासँ गप्प कएला बाद हम कहब किएक तँ गप्प एक दू महिनाक नहि छै एक सबा बरखक छै |”
एतवामे दलानक कोन्टासँ मिशरजीकेँ कनियाँक चूड़ीकेँ खनखनाइक आवाज एलन्हि | मिशरजी घुमि कए देखला उत्तर प्रशांतजीसँ, “ कनीक अबै छी |” कहैत उठि कनियाँ दिस चलि गेला |
मिशर जीसँ हुनक कनियाँ, “हम सभटा सुनलहुँ, ई तँ ठीके अचूक इलाज छै आ अहाँ बुझिते छीऐ जे हमरो माए गठियासँ परेसान छै | अहाँ अपन माए लेल ली की नै हमरा नै बुझल मुदा काइल्ह चिन्टू गाम जा रहल छै, ६ महिनाक दवाइ लए कऽ चिन्टू दिया हमरा माए लेल पठा दियौ बांकी ६ महिना बाद फेरो कियो गाम जेबे करतै तखन |”
कनियाँक गप्प सुनि मिशरजी वापस आबि कुर्सीपर बैसैत, “ठीक सर, आब अपने एतेक कहैत छी तँ ६ महिनाक दवाइ हमरा दए दिअ |”
प्रशांतजी, “ठीक छैक परशु सुजीतजी अहाँकेँ दए देता |”
मिशरजी, “परशु नहि हमरा काइल्ह भोरे चाही किएक तँ ई हमर माए लेल नहि हमर सासु लेल छन्हि आ काइल्ह भोरे १० बजे हमर सार चिन्टू गाम जा रहल छथि | तेँ तँ एक्के बेर ६ महीनाक दवाइ मंगा रहल छी |”
प्रशांतजी, “कोनो बात नै काइल्ह भोरे ९ बजे तक मिल जाएत | सुजीत जीकेँ पाइ दए दियौन्ह मुदा हाँ  गएरेन्टी नहि भेटत |”
मिशरजी, “किएक |”
प्रशांतजी, “ई गारेन्टी अहाँक माए लेल छल, किएक तँ अहाँक माए हमर माए दोसर ओ हमर आँखिक सोझाँ छथि हुनका हम देखो सकै छीएन्हि, ठीक भेली की नहि मुदा अहाँक सासु... “
मिशर जी, जेबीसँ पाइ निकालि कए दैत, “यौ प्रशांतजी अहुँ की गप्प करै छी अहाँ देलहुँ हमरा बिस्वाश भऽ गेल ई पाइ राखू मुदा हाँ भोरे ९ बजे धरि दबाइ भेट जेबा चाही नहि तँ अपने बुझिते छियै कनियाँ सार सासु |”
प्रशांतजी, “हाँ अवस्य, (उठैत) अच्छा आब आज्ञा दिअ |”
दुनू गोटे बिदा भेला | मोटर साईकिलपर बैसला बाद बैसले- बैसल सुजीतजी, “प्रशांत भाइ देखलियैन्ह, माए लेल गारेन्टी चाही भाइ सभक सहमति चाही आ सासु नामे चट्टे ६ महिनाक पाइ निकैल गेलन्हि |”    
*****
जगदानन्द झा 'मनु'
                            

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें