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गुरुवार, 23 मई 2013

गंगा स्नान

"एहि बेर तँ गंगा असनान कैये लिअ काकी ।"बलहाबाली लाल काकीकें एहि बेरक कुम्भक महिमाक बखान करैत कहलनि ।अन्तमे लाल काकी तैयार भऽ गेलनि ।निश्चित दिन जीपसँ दरभंगा आबि गेलनि ।
गाड़ी आबैमे देरी छलै तें टीसनसँ बाहर आबि गेलनि ।तखने देखैत छथि जे तीन टा पुलिस एकटा बीस-बाइस वर्षक नवयुवककें लठियाबैत लऽ जाइत छल ।युवक चिचियाइत छल "हम छात्र छी, पाकेटमार नै ।हम किछु नै केलौं ।छोड़ि दिअ . . ."
पुलिस ओकरा फटकारैत कहलकै "उ तँ हमरो पता है ।लेकिन रुपैया दो तखन छोड़ेगा ।"
काकीकें रहल नै गेलै ।गंगा स्नान लेल जे पाइ छल सब पुलिसकें दऽ युवककें छोड़ा लेलनि ।युवककें पुछलापर कहलनि "तोरामे हमर भुतलाएल बेटा देखाइ देलक तें हम तोरा छोड़ेलिअ ।"
ई कहि लाल काकी पाइक खगतामे पएरे गाम दिश चलि देलनि ।

अमित मिश्र

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