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रविवार, 19 मई 2013

भूख

विहनि कथा-22
भूख

ओ पगली छलै ।पच्चिस-छब्बिस वर्षक भरल-पूरल देह मुदा दिमाग घसकल ।नित दिन टीसनपर इम्हरसँ उम्हर टहलनाइ ओकर मुख्य काज छलै । फेकल पन्नी वा अखबारक टूकड़ामे सटल अन्नक किछु दाना ओकर भोजन छलै ।आबैत-जाइत ट्रेन दिश एकटक देखैत ,कखनो कऽ कोनो खिड़की लऽग चलि जाइ ।फेर की टी॰टी॰क दबाड़ सुननाइ आ पुलिसक लाठी सहनाइ ,ओकरा लेल सबदिना छलै ।किओ ओकरा छूअ नै चाहै ।
एक दिन भोरे-भोर अखबारमे छपल एकटा खबरपर नजरि अटकि गेल ।काल्हि राति किओ ओहि पगली संग बलात्कार कऽ ओकर घेंट चापि देने छलै ।हमर मोनमे एकटा प्रश्न बेर-बेर उठि रहल छल ।की वासनाक भूख एते ताकतबर होइ छै जे जाति-पाति ,धर्म-कर्म आ मनुखक स्थिती धरि नै देखै छै ?लागि रहल छल जँ भूख एहिना बढ़ैत रहत तँ महाप्रलय आबैमे कम्मे दिन शेष छै ।

अमित मिश्र

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