नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

बाल कविता : कोना टूटतै जामुन ?


कारी तोहर रूप छौ जमुनी तैयौ लागें बहुते मीठ
ई चिड़ैयाँ नै जामुन खसबै सतमे ई छै बहुते ढीठ
कतबो ढेला फेकै छी तैयौ ठीक ठाढ़ि धरि पहुँचै नै
कोनो ठाढ़िपर जा कऽ लटकल, घूरि कऽ ढेला आबै नै
लग्गी लटकल, ठेंगा लटकल, लटकल बहुते चप्पल
मोन हकमल, घामे-पसिने, तैयो जामुन नै भेटल
कोना टूटतै गाछसँ जामुन ? भारी सबाल बनल अछि
तखने एकटा छौड़ा बाजल, ई तँ बहुत सरल छै
आश लगेने बैसै जाइ जो, बिछा कऽ चट्टी बोरा
जखने सिकहत अदृश्य हवा, तँ खसतै झोराक झोरा

अमित मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें