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जय मिथिला जय मैथिली

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शनिवार, 19 जनवरी 2013

गजल


कखनो कियो हमरो प्रेम करबे करत
गेलहुँ जँ नै हम घर बाट तकबे करत

भागैत अछि टोलक लोक नामसँ हमर
एकदिन सभ हमरो संग चलबे करत

बैसल घरे घर सभ कान मुनने अपन
दोसर मुँहे हमरो लेल सुनबे करत

के एतए अमृत पी कए आएल
सभ एक नै दोसर दिन मरबे करत

जे प्रेम केलक कहियो जँ मिसियो ‘मनु’सँ
दू नोर मरलापर ओ तँ कनबे करत

(बहरे सलीम, वज्न – २२१२-२२२१-२२२१)
जगदानन्द झा ‘मनु’

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