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जय मिथिला जय मैथिली

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बुधवार, 7 नवंबर 2012

गीत

भईया क त अहाँ जगेलिये हमरो भाग्य जगबियो नै
अपना सन सुरतिया भऊजी हमरो लेल तकियौं नै
चान सनक नहिं चाही हमरा , चाही अहीं सन गोर यै
सुगा सनके नहिं चाही , लाल अहीं सन ठोर यै
अहाँ गाम होय जौं भऊजी बात बढ़बियो नै
अपना सन सुरतिया भऊजी हमरो लेल तकियौं नै
गाल पर तिलवा बेषक नहिं होय , होय अहीं सन दिल यै
अहाँ जौं कनिको ध्यान देबय त हेतै नहिं मुष्किल यै
छोट दियर मनक आषा अहाँ पूरबियो नै
अपना सन सुरतिया भऊजी हमरो लेल तकियौं नै
जिनगी भरि हम पैरि दबायब , रहब अहसानमन्द यै
अपने सन दियादिनी भऊजी करयौ नहिं पसन्द यै
एहि लगन में आशिक के भऊजी बिआह करबियौ नै
अपना सन सुरतिया भऊजी हमरो लेल तकियौं नै
भईया क त अहाँ जगेलिये हमरो भाग्य जगबियो नै
अपना सन सुरतिया भऊजी हमरो लेल तकियौं नै

आशिक ’राज’

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