नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

गुरुवार, 22 नवंबर 2012

दुर्गाक अर्थ


शक्तिक अवतारिणी, पापी सभहक़ संहारिणी, महाविद्या, महामाया, महामेधा, महामायास्वरूप, कालरात्रि, महारात्रि, मोहरात्रि, अम्बे, अम्बिका जगतमाता अधिष्ठात्री माँ भगवती तीनु लोकक माता माँ भगवती सम्पूर्ण संसार के रचयिता आ पापीक संहारक छथि | माँ भगवती सम्पूर्ण संसारकें स्फूर्ति प्रदान करैत छथि आ सम्पूर्ण संसार ओहि सँ उत्पन्न भए ओहिमे पुनः प्रवेश कए जाइत छैक |
या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेणसंस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
संस्कृत में दुर्गाक अर्थ होइत छैक --- वो जे कि बुझैसँ अथवा ओतय जाहि ठाम पंहुचय में असंभव होय | माँ भगवती शक्तिक अवतारिणी के संगे-संगे नारी शक्तिक के पर्याय सेहो मानल जाइत रहलखिन अछि | वस्तुतः माँ भगवतीक कृपामयी आओर वरदायिनी महिमा सदिखनसँ, कहल जाय अनादिकालसँ एक टा रहस्ये रहल अछि | एहि कारणसँ हिनका कतेक रास नामसँ जानल जाइत छन्हि-- हिनका काली, तारा पार्वती, अम्बिका, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, कमला आदि विभिन्न आस्थाक नाम छैन्हि | माँ दुर्गाक अवतार के कतेक कथा प्रचलित अछि मुदा शिवपूराणक एक कथाकें अनुसारे एहन मानल जाइत छैक प्राचीन समयमे एक दुर्गम नामक असुर बड्ड शक्तिशाली छल जेकरा ब्रह्माक अजेय वरदान प्राप्त छलैक | कथा अनुसारे दुर्गमासुर आ माँ भगवती के बीच भयंकर युद्ध भेल | एहि युद्धमे माँ भगवतींक देहसँ काली, तारा, भुवनेश्वरी आदि दशो महाविद्या प्रगट भेलखिन आ एहिसभ महाविद्याक पराक्रमसँ दुर्गमासुर के वध भेल | आ ओहि समयसँ माँ भगवतीके दुर्गा के रूप में जानय जा लागल |`कथा तs ओना आर छय जेकर चर्चा बाद में कायल जैतक |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें