नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शनिवार, 3 नवंबर 2012

रुबाई

जतय सॅ नहिं कियो आबेति अछि  ओतह चलि गेलीह
जतय चिटिठयो नहिं जा सकय अछि तेतह चलि गेलीह
कियैक चुप छी अहाँ सभ , कियैक नहिं बाजेति छी
हमरा छोडि़ के हमर प्राण कतह चलि गेलीह

आशिक ’राज’

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें