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जय मिथिला जय मैथिली

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गुरुवार, 15 नवंबर 2012

गजल

चलै चुनमुन चलै गुनगुन तमासा घुमि कए आबी 
जिलेबी ओतए छानैत तोहर भेटतौ बाबी 

पढ़ैकेँ छुटल झंझट भेल इसकूलक शुरू छुट्टी 
दसो दिन राति मेला घुमि कए नव वस्तु सभ पाबी 

करीया बनरिया कुदि कुदि कए ढोलक बजाबै छै  
चलै चल ओकरा संगे हमहुँ नेन्ना कनी गाबी 

बनल मेनजन अछि बकड़ी पबति बैसल अचारे छै 
बरद सन बौक दिनभरि चूप्प रहए पहिरने जाबी    

बुझलकौ आब तोरो होसयारी 'मनु' तँ बुढ़िया गै 
लगोने ध्यान वक कतएसँ सम्पति नीकगर दाबी    

(बहरे हजज, 1222 चारि-चारि बेर सभ पांतिमे)

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