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जय मिथिला जय मैथिली

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शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

बाल रूबाइ

बाल रूबाइ-1

बौआ कान नै चोरबा आबि जेतै
चन्ना गेलै सूतऽ फेर काल्हि एतै
बौए लेल जागल छै आब तरेगण 
भोरे सूर्यक संग गीत नाद हेतै

बाल रूबाइ-2

बड़का पोखरि पोखरिमे बड माँछ छै
मलहा जालसँ बौआ बंशी लऽ मारै
बड़का माँछ फँसै छै महाजालेमे
बौआ मात्र टेँगरा पोठिये पकड़ै


बाल रूबाइ-3

पोथी पढ़ब इस्कूलमे मोनसँ आइ
खेबै खूब इमली तोड़ि गाछसँ आइ
खेलब साँझमे कबड्डी खूब दौड़ब
ज्ञानक बात सीखब हमहुँ खेलसँ आइ



बाल रूबाइ-4

भोरक नव लाल इजोत छेँ तूँ बुचिया
देशक जीत लेल खेलाड़ी तूँ बौआ
माँ बाबूक लाठी साँस तूँहीँ तऽ छेँ
उड़िया नै मातल हवामे तूँ बेटा


बाल रुबाइ-5

बौआ रे चोरी नै करबाक चाही
सदिखन पैघक बात मानबाक चाही
बुचिया तोहर नाम हेतौ दुनियाँमे
अपनामे कखनो नै लड़बाक चाही



बाल रूबाइ-6

हे गै करिकी गाय गरम दूध दे ने
तोरो दऽ दै छी हरियर जनेर ले ने
देबेँ दूध तऽ दही पेड़ा घी खेबौ
मानेँ मैया नै तऽ उपास भेले ने


बाल रुबाइ-7

पीठपर झोरा और हाथमे बोरा
बौआ चलल इस्कूल लऽ पोथी जोड़ा
कारी सिलेट चारि टा उजरा पेन्सिल
संगी बनि नीक पेन्सिल देतौ तोरा

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