नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jnjmanu@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

गजल


रहब आब नै दास बनि हम 
अपन नीक इतिहास जनि हम 

जखन ठानलहुँ हम अपनपर 
समुद्रो लएलहुँ तँ सनि हम 

उठा मांथ जतएसँ तकलहुँ 
दएलहुँ  तँ नक्षत्र गनि हम 

हलाहल दुनीयाँक पीने
चलै छी अपन मोन तनि हम 

जमल खून मारलक धधरा 
लएलहुँ विजय विश्व ठनि  हम

(बहरे मुतकारिब) 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें