नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

बाल-गजल


हे मए  नहि चरबै लए   गाए जेबौ हम 
पठा हमरा इस्कूल कोपी पेन लेबौ हम   

अपन भाग्य आब हम अपने सँ लिखबौ 
कुकूर जकाँ नै   माँडे तिरपीत हेबौ हम 

रोगहा-रोगहा सभ कियो  कहए हमरा
एक दिन बनि डाक्टर  रोग हरेबौ  हम

टूटल- फूटल अपन फुसक घर तोरि
सुन्नर सभ सँ पैघ महल बनेबौ हम 

हमरा कहैत अछि 'मनु' मुर्ख चरबाहा
पढि कए   सभ चरबाहा केँ पढेबौ हम 

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण- १६)
जगदानन्द झा 'मनु'
  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें