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जय मिथिला जय मैथिली

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रविवार, 8 जुलाई 2012

आश जे लागल अछि

संतप्त धरातल अछि  
दुष्कृति स पाटल अछि 
मनुख बिसारि स्वरुप 
अनेड़ो फाटल अछि 
तइयो नै जानि किया 
ई मोन त पागल अछि
बदलत ई सब एक दिन 
ई आश जे लागल अछि

निःशब्द ई धरती अछि 
खेत पथार जे परती अछि 
बिलटल उपजा बारी
रौदी जे छायल अछि 
तइयो नै जानि किया 
ई मोन त पागल अछि
उपजत  ई सब एक दिन 
ई आश जे लागल अछि

गाछ बृक्ष मूड़झायल अछि 
बारी झाड़ी भकुआयल अछि
देख मनुख केर चालि-प्रकृति 
विधनो के मोन घायल अछि 
तइयो नै जानि किया 
ई मोन त पागल अछि
पलटत ई सब एक दिन 
ई आश जे लागल अछि

आशान्वित छी सदिखन
सम्हरत ई जनजीवन 
रहला जौं दैव सहाय
पुरत सब आश फूलाय
विस्वास त जागल अछि 
तैं मोन त पागल अछि
सुधरत ई सब एक दिन 
ई आश त लागल अछि

राजीव रंजन मिश्र 

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