नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jnjmanu@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

गजल


कोना कहू हम आई एतेक मजबूर किएक
प्रीतमक विछोड आई हमरा मंजूर किएक

हम तकैत रहिगेलौं नयन सं नयन मिला
छोड़ी हमरा चलिगेल प्रीतम निठुर किएक

दोष हुनक नै कोनो दोष अछि सभटा हमरे
आई बुझलौं हमरा में एतेक गुरुर किएक

ओ जान प्राण सं प्रेम करैत छलि हमरा सं
हम सदिखन रहलौं हुनका सं दूर किएक

हम परैख नहि सकलौं हुनक निश्च्छल प्रेम
आई बिछोड पीड़ा सं दिल हमर चूर किएक

आई हुनक डगर के हर मोड़ अछि अलग
हुनक जीनगी में बनब हम बबुर किएक

"प्रभात क "दिन भेल दुर्दिन प्रीतम अहाँ विनु
अहाँक सपना हम केलौं चकनाचूर किएक

वर्ण-१८
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट  : गजल संख्या -५९

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें