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जय मिथिला जय मैथिली

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गुरुवार, 21 जून 2012

गजल


हम कहानी जीवन केर सुनाऊ कोना
करेज चिर कs घाऊ हम देखाऊ कोना

नाम हुनके जपैतछि जे देलक दगा
द्गावाज प्रीतम सँ दिल लगाऊ कोना

चमकैत रूप पाछू जे भागल दीवाना
ओहन दगावाज के हम मनाऊ कोना

विछोडक पीड़ा सँ सुल्गैत अछि करेज
धुँवा धुँवा अछि जीनगी बताऊ कोना

विसरल नै जाईए ओ मिलनक पल
प्रीतमक ईआद दिल सँ भगाऊ कोना

जरल करेज में प्रेम जगाएब कोना
दिल में प्रेमक दीया आब जराऊ कोना

वर्ण-१५------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट

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