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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 19 जून 2012

गजल


आजुक नेता सबहक कूटनीति आ चाल देखू त'
मातृभूमि क' नोचि- नोचि खा गेल अछि खाल देखू त'

जनता धन सौं जेब भरि, करे कते निम्मन बात
ऊहे जनता क' कोना केने एहन छै हाल देखू त'

निर्धन लोक क भेटै रोटी ओ अन्न सौं भरैथ कोठी
खा बैमानी क' रोटी भेल छै केहन ई लाल देखू त'

मुहँ चिबा भाषण दै कनेको एकरा लाजो नै होए
हैरत छी हैत की हिनकर अगला चाल देखू त'

जे भारत माँ क' नै छोरल ओ अपन माँ क' छोरत
जन्म द' हिनका हिनक माँ क' होए मलाल देखू त'

शनि राहु ग्रह देखू चाहे आजुक कुपात्र नेता क'
कतेक बढ़ल जाई ''रूबी'' जुग में जपाल देखू त'
वर्ण -१९
रूबी झा

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