नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

गुरुवार, 28 जून 2012

बाल गजल

बाल गजल-५

कीन दे मुरही-कचरी-झिल्ली लवनचूस आ बिसकुट माँ 
लोढि बाधसँ धान जे अनलौ तकर कीन दे तिलकुट माँ

धान अगोअं के जे उसरगल तकर कीन दे फीता-बाला 
काकी जे देलखिन बाला से हाथमें होई छइ छुट-छुट माँ

ललका फीता गूहल जुट्टी तेल सँ माथा गमकै गम-गम 
थकरै केश जहन ककबा लऽ ढील केऽ मारै पुट - पुट माँ

देखि भूख सँ लोहछल नेन्ना दुःख-सुख सभटा लोप भेलै
भंसा घर में घाम सँ भीजल काज करै सभ चुट-चुट माँ

होय कहाँ अनका देखबैलै "नवल" इ मायक माया-तृष्णा
भेड़ निन्न तइयो कहि खिस्से दूध पियाबय घुट-घुट माँ

--- वर्ण- २२ ---
(सरल वार्णिक बहर)
►नवलश्री "पंकज"◄
< २४.०६.२०१२ >

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें