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सोमवार, 28 मई 2012

गजल @ प्रभात राय भट्ट


ई धरती ई  गगन रहतै जहिया धरि 
अप्पन प्रेम अमर रहतै तहिया धरि

कहियो तँ  ई  दुनियाँ  बुझतै प्रेमक मोल
प्रेमक दुश्मन जग रहतै कहिया धरि

बाँझ परतीमे खिलतै नव प्रेमक फूल
प्रेमक फूल सजल रहतै बगिया धरि

कुहू कुहू कुहकतै कोयल चितवनमे
जीवनक उत्कर्ष रहतै सिनेहिया धरि 

प्रीतम "प्रभात" संग नयन लड़ल मोर
भोरसँ  दुपहरिया साँझसँ  रतिया धरि 

..........वर्ण-१६...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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