नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

सोमवार, 28 मई 2012

गजल

चान सँ सुन्नर सजनी हमर एहेन  नै  केखनो सोचलौं हम
भाग में लिखलाहा छल हमर जे अहाँ केँ  अपन  बनेलौं हम
 
एक चान अछि धरती केँ  ऊपर जेकरा सभ  कियो देखते छी
दोसर हमर हृदय में बसल पाँज में जकरा भरलौं हम
 
अहाँ छी सुन्नर हे मनमोहनी तन मन सभ निश्छल अहाँ केँ
एहि सादगी पर मरि मीटलौं अहीँक पूजा करै लगलौं हम
 
आँखि मुनि आ खोलि हम  सामने हमर अहाँ रहै छी सदिखन
सुन्नर छबी निहारैत अहाँ केँ अहीँक लौलसा में रहलौं हम
 
चन्ना ताराक संग जेना छैक सुख दुख पल-पल जीबन भरि
रहि जीबन भरि 'मनु' सुगँधाक जीबन अहाँ केँ सोपलौं हम 
 
(वर्ण- २४)  
जगदानन्द झा 'मनु'
 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें