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गुरुवार, 17 मई 2012

एक करोड़क दहेज



संजना आ संजयकेँ ब्याहक तैयारीमे जोर-सोरसँ संजनाक  बाबूजी  आ हुनक सभ परिबार तन-मन-धनसँ लागल संजना आ संजय दुनू  एक्के संगे मेडिकलमे पढ़ै छल ओहि बिच दुनूमे पिआर भेलै आ आब सभक बिचारसँ ब्याह भए  रहल छैक । चूकी संजयकेँ  पिताजी अप्पन  ऑफिसक काजसँ युएसए गेल रहथि आ एहि ठाम हुनक सभटा काज हुनक छोट भेए  अर्थात संजयकेँ कक्का कएलनि
आब  काइल्ह ब्याह तँ  आइ  गाम एलथि  गाम परहक सभ तैयारी देख ओ प्रशन्न भेला बाते बातमे हुनका ज्ञात भेलनि जे कन्यागत दिससँ पंद्रह लाख रुपैया दहेज सेहो संजयकेँ  कक्का ठीक  केने छथि आ कन्यागत देबैक लेल सेहो मानि गेल छथि मानितथिन  किएक नहि उच्च कुल-खनदान, वर डॉक्टर,वरक बाबू बड्डका डॉक्टर, गाममे सए  बीघा खेत, बेनीपट्टीमे शहरक बीचो-बिच चारि बीघाक घड़ाड़ी 
मुदा  संजयक बाबूकेँ ई बातसँ किएक नहि जानि खुशी  नहि भेलन्हि  ओ तुरंत ड्रायबरकेँ  कहि गाड़ी निकलबा कन्यागत ओहिठाम पहुँचलाह काइल्ह ब्याह आ आइ  वरक बाबू उपस्थीत, मोनक संकाकेँ  नुकबैत कन्यागत दिससँ कन्याँक बाबू सहीत सभ दासोदास उपस्थीत पानि, चाह शरबत, नास्ता, पंखा सभ  प्रस्तुत कएल गेल संजयक बाबू ओहि  सभकेँ  नकारैत दू टूक बात संजनाक बाबूसँ बजलाह,  " समधि कनी हमरा अपनेसँ एकांतमे गप्प करैक अछि "
हुनक  संकेत पाबि सभ गोते ओहि ठामसँ हटि गेलाह, मुदा सभक मोनमे अंदेसा भरल, कतेको गोटा दलानक कोंटासँ सुनैक चेष्टामे सेहो सभकेँ गेला बाद संजयक बाबू संजनाक बाबूसँ,  "समधि ! हम तँ  एखने दू घंटा पहिने युएसएसँ एलहुँ क्षमा करब पहिने समाय नहि निकालि पएलहुँ, मुदा ई की सुनलहुँ अपने पन्द्रह लाख रुपैया दहेजमे दए  रहल छी "
संजनाक बाबू  दुनू  हाथ जोरने,  "हाँ समधि जतेक अपनेक सभक मांग रहनि हम अबस्य पूरा करबनि "
संजयक बाबू,  "जखन मांगेक गप्प छैक तँ  हमरा एक करोड़  रुपैया चाही "
सुनिते संजनाक बाबूक आँखिक आँगा अन्हार भए  गेलनि, आ आनो जे सुनलक सेहो दांते आँगुर कटलक संजनाक बाबू पुर्बबत दुनू हाथ जोड़ने,  "एहेन बात नहि कहु समधि पंद्रह लाख जोड़ैमे तँ  असमर्थ छलहुँ आ ई एक करोड़ तँ  हम अपनों बीका कए  नहि आनि सकै छी |"
कहैत निचा झुकलनि शाइद संजयक बाबूक पएर छुबैक चेष्टामे मुदा निचा झुकैसँ पहिले संजयक बाबू हुनका उठा अपन करेजासँ लगा,  "ई की पाप दए  रहल छी, पएर तँ  हमरा अपनेक पकरबा चाही जे अपने अपन बेटी दए रहल छी  आ रहल पाइ  तँ  हमरा एक्को रुपैया नहि चाही भगबानक कृपासँ हुनक देल सभ किछु अछि रहल एक करोड़क बात तकरा क्षमा करब ओ छ्नीक ठीठोली छल, जखन मांगने पंद्रह लाख भेटत तँ  एक करोड़ किएक नहि जे आगू  कोनो काजो नहि कर परेए आ की अपनेक बेटी आ हमर पुतौह एक करोड़सँ कमकेँ छथि हा हा हा .... ।“ 
एका एक चारू कात नोराएल आँखिसँ ड़बड़बेल खुशीक ठहाका पसरए लागल   
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जगदानन्द झा 'मनु'

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