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जय मिथिला जय मैथिली

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रविवार, 6 मई 2012

गजल

कतय पुरनका  गाम हेरायल
किंचित् हमरो नाम हेरायल

प्रेम-सहज, सद्भाव, समर्पण
सचमुच ई परिणाम हेरायल

बुधियरका सब गेल 
शहर मे
हुनको छन्हि आराम हेरायल

शहर सँ टाका
, गामक खेती
सब छूटल,
अंजाम हेरायल

सुख-दुख मे जे छल सहयोगी
हृदय-भाव, सत्काम हेरायल

मान करय छल छोट, पैघ के
लागय एखन लगाम हेरायल

सुमन सहोदर भाग्य सँ
भेटल
पुनि ताकू अछि राम हेरायल

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