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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

गजल

 कहियौ छोड़ब नै  अहाँक पछोर यौ अहाँ जायब कतऽ
राखब संगे अहाँ के साँझ सँ भोर यौ अहाँ जायब कतऽ

चिन्हलौ नहि जानलौ अहाँ किएक एखन धरि हमरा
प्रेम बरखा सँ करब सराबोर यौ अहाँ जायब कत़ऽ

अहाँ लेल तियागल लाजो तियागल धाखो अहीँक लेल
प्रेम सरिता बहाएल पोरे पोर यौ अहाँ जायब कतऽ

छोरलहुँ हम नैहर सासुरो छोरलहुँ अहिँक लेल
मायक ममताक छोड़लहुँ कोर यौ अहाँ जाएब कतऽ

अहाँ बाजु एकबेर  किरीया खाउ हम ककरा लगा के
मात्र अहीँटा छी "रूबी"के चितचोर यौ अहाँ जाएब कतऽ

         (सरळ वार्िणक़ बहर ) बर्ण-२१

रुबी झा

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