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जय मिथिला जय मैथिली

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शनिवार, 14 अप्रैल 2012

गीत

तर्ज - चाँदी की दीवार ना तोड़ी
लड़का - समाज के अहाँ रीत नहिं तोडि़ के हमरा दिल के तोडि़ देलौं
बेर्ददी केहेन भेलौं हमरा सॅ नाता तोडि़ लेलौं
खएलौं जे सपथ हम दुनु जिनगी भरि संगहि रहब
सौंसे दुनिया छोडि़ देबय अहाँ बिना नहिं हम जियब
सौंसे दुनिया छोडि़ देबय अहाँ बिना नहिं हम जियब
आई सबटा बिसरि के सजनी देह सौ प्राण निकलि गेलौं
समाज के अहाँ रीत नहिं तोडि़ के हमरा दिल के तोडि़ देलौं
जखन अहाँ के डोली गाम क सीमा टपल
तखन हमरा लागल सजनी देह के ऊपर व्रज खसल
तखन हमरा लागल सजनी देह के ऊपर व्रज खसल
कोना अहाँ हमरा बिसरलौं कोना के मुँह मोडि़ लेलौं
समाज के अहाँ रीत नहिं तोडि़ के हमरा दिल के तोडि़ देलौं
लड़की - बिसरि जाउ हमरा यौ सजना एहि प्यार के एगो सपना बुझि
माफ क दियऽ यौ सजना अहाँ हमरा अपना बूझि
माफ क दियऽ यौ सजना अहाँ हमरा अपना बूझि
बड़ गलती भेल हमरा सौं एहेन हाल में एलौं
समाज के हम रीत नहिं तोडि़ के अहाँ दिल के तोडि़ देलौं
ल्ड़का - बिसरि जाउ कोना ये सजनी अहाँ सॅ जे प्रेम कएलौं
अहीं कहू हमरा सजनी कोना के अहाँ बिसरि गएलौं
अहीं कहू हमरा सजनी कोना के अहाँ बिसरि गएलौं
जीबय छी हम जीबते रहब याद अपन संग छोडि़ देलौं
समाज के अहाँ रीत नहिं तोडि़ के हमरा दिल के तोडि़ देलौं
समाज के हम रीत नहिं तोडि़ के अहाँ दिल के तोडि़ देलौं

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