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गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

कुण्ठित मानवता

घरमे मुरारीजिक कनियाँ अपन आठ बर्खक बेटा आ पाञ्च बर्खक बेटीकेँ  कोनोना सम्हारैमे लागल, मुदा हुनक मोनक भावसँ साफ देखा रहल छल जे हुनकर मोन पुर्णतः मुरारीजीपर लागल छलनि, जे की रातिक दस बजला बादो एखन धरि  नोकरीसँ घर नहि एलथि |
कोनोना दुनू  बच्चाकेँ  सुतेलथि | समयक सुइया सेहो आगू  वरहल | दससँ एगारह बाजल | हुनक मोनमे संका सभक आक्रमण भेनाइ स्वभाबिक छल | एना तँ एतेक राति पहिले कहियोक नहि भेल रहनि  | सहास करैत घरसँ बाहर निकैल, अपन भैंसुरक अँगना पहुँचली | हुनका सभकेँ  कहला बाद शुरू भेल युद्धस्तरपर मुरारीजिक खोज | मुदा सभ  मेहनत खाली मुरारीजिक कोनो पता नहि | हुनक आड़ामिल जाहिठाम ओ काज करैत छलथिसँ ज्ञात भेल जे हुनक छुट्टी तँ  साँझु पहर पाँचे बजए भए गेल रहनि आ ओ अपन साईकिलसँ एहिठामसँ बिदा सेहो भए गेल रहथि |
तकैत-तकैत भोरे चारि बजे हुनक लाश  पिपरा घाटक सतघारा बला धूरि पर भेटल | देखते मातर सभक हाथ-पएर सुन्न | कनाहोर मचल | बादमे स्थानीय प्रतक्षदर्शीसँ ज्ञात भेल की ओ एहिठाम साँझकेँ  साते बजेसँ छथि, किछु गोटे हुनका हाथ-पएर मारैत देखि बैजतो रहेजे, 'बेसी शराब पि क' ड्रामा कए  रहल अछि |'
मुदा हाय रे कुण्ठित मानवता कियोक हुनक बास्तबीक कारण बुझहक प्रयास नहि कएलक, नहि तँ ओ एखन जिबैत रहितथि | हुनका तँ  एपेडेंसीक दर्दक बेग रहैन आ समय पर उपचार नहि हेबाक कारणे ओ चलि बसला |

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जगदानन्द झा 'मनु'

1 टिप्पणी:

  1. कहल जाइत छैक दूधक बोतलमे शराब वा शराबक बोतलमे दूध- से गाम -गाम शराबीक एतेक संख्या बढलइक जे एहेन भ्रम स्वाभाविक!

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