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जय मिथिला जय मैथिली

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गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

जगह



महानगरीय जीवनक अव्यवस्थित आ व्यस्त जीवनमे समयकेँ  आगू लचार आजुक जीवन शैली |
रामप्रकाशकेँ माए अपन बेटा-पुतहु आ पाञ्च बर्खक पोता कए दर्शन आ किछु दिन हुनक संग बिताबैक लोभमे अपन गामसँ दिल्ली रामप्रकाश लग एलथि |
रामप्रकाश एहिठाम सरकारी दू कोठलीक मकानमे रहै छथि | माए  कए आगमनक बाद, जगहकेँ दिक्कत कारणे हुनकर ओछैन बालकोनीमे एकटा फोल्डिंग खाटपर लगाएल गेल |
रातिमे एसगर निन्दक अभाबे करट बदलैत, माएकेँ  मनमे ओहि दिनक सुमरण आबि गेलन्हि, जखन गामक फुशकेँ  एक कोठलीक घरमे केना ओ दुनू बियक्ति अपन तिनटा बच्चा संगे गुजारा करैत छलथि, मुदा आइ एहिठाम ओ बच्चा दू कोठलीक घरमे माएक निर्वाहमे असमर्थ बालकोनीमे ओछैन केलक |
माएकेँ आँखिसँ नोरक बूंद टपकैत, नै जानि केखन आँखि लाइग गेलन्हि |

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