नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

‎[{ होली गीत }]

होली एलै जोगीरा गयबाक मोन होइ यै .
मस्त धुन पर नचबाक मोन होइ यै ,
जाइ छी होली गीतक सीडी किनै लए ,
शहर मे रहि गामक यादि किनै लए ,
हौ भाइ ,घुमि एलौँ पुरा बजार ,
कत्तौ नै भेटल परंपरागत गीतक भंडार ,
नै भेटल "शिव मठ पर लाल धुजा"
नै भेटल "आजु जनकपुर होरी रे रसिया"
खुब बिकै छै द्विअर्थी अश्लील गीत ,
छिनरपन कए बान्ह तोड़ै छै नव गीत .
जीजा-शाली , देवर-भौजी कए बेपर्द गीत ,
लाज लागै यै कहैत , कत्त-कत्त रंग लागाबैए नव गीत ,
होली रातिक खेल बुझू सब पागल भ गेलै ,
माँ-बाप कए सामने छौड़ा दारू-भांग हवश कए प्यासल भ गेलै ,
नहि जी सकै छी होली मे पुरान लोक आब ,
आँखि-कान मुनि लिअ पुरान लोक आब .
हमहूँ जाइ छी कोठी कोन मे नुका सुतै लए ,
अपन कविता कए इज्जत बचबै लए . . . । ।
अमित मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें