नील पट्टीकेँ क्लीक कए कs ब्लॉगक सदस्य बनल जाउ

जय मिथिला जय मैथिली

रचना मात्र मैथिलीमे आ स्वम् लिखित होबाक चाही। जँ कोनो अन्य रचनाकारक मैथिली रचना प्रकाशित करए चाहै छी तँ मूल रचनाकारक नाम आ अनुमति अवश्य होबाक चाही। बादमे कोनो तरहक बिबाद लेल ई ब्लॉग जिमेदार नहि होएत। बस अहाँकें jagdanandjha@gmail.com पर एकटा मेल करैकेँ अछि। हम अहाँकेँ अहाँक ब्लॉग पर लेखककेँ रूपमे आमन्त्रित कए देब। अहाँ मेल स्वीकार कएला बाद अपन, कविता, गीत, गजल, कथा, विहनि कथा, आलेख, निबन्ध, समाचार, यात्रासंस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्ध रचना, चित्रकारी आदि अपन हाथे स्वं प्रकाशित करए लागब।

मंगलवार, 20 मार्च 2012

गजल

प्रस्तुत अछि रूबी झाजिक एकटा गजल सरल वार्णिक बहर में

तरहत्थी दीप जरा हम ठारै छलौ,
अहाँक जोहैत रस्ता हम ठारै छलौँ ,

अहाँ आएब एहि बाटे फुईसे छलै ,
लेलौं किए हाथो पका हम ठारै छलौँ ,

कठोर अहाँ देखलौं नै आँखिक नोर ,
मुदा कानि आँखि फुला हम ठारै छलौँ ,

हमर दर्दक मोल नै जनलौ अहाँ ,
कनी बुझितहुँ व्यथा हम ठारै छलौँ ,

अहीं केर आशमें जँ मरब कहियो ,
नै आनब नामो कदा हम ठारै छलौँ ,

बेदर्दी अहाँ दर्द बुझब कि हमर,
मुदा व्यर्थ पिडा बता हम ठारै छलौँ|

-----------वर्ण -१४ ---------
रूबी झा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें