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जय मिथिला जय मैथिली

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शुक्रवार, 16 मार्च 2012

गजल

प्रस्तुत अछि रूबी झाजिक एक गोट गजल सरल वार्णिक बहर में ----
गजल -
हे यै शोना,आँहाक रुप लगै सोना जेकाँ
गोर गालक तील कोनो जादु टोना जेकाँ

मेघ सन कारी केश गरदन शोभैय
जुट्टी एँचल आँहाक नागक फेना जेकाँ

चितवन चंचल जेहन कामी हिरनी
ताहु पर काजर मशीह भौं शोना जेकाँ

देह छर-हर गाछ कुसियारक जेना
रस पोरे-पोर चीनीक बसोना जेकाँ

आँहा चली बाट मोन होय बड्ड उचाट
गम गम गमकै छी फुलक दोना जेकाँ
-------------वर्ण -१५ ---------
रुबी झा

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