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जय मिथिला जय मैथिली

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बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

ओढ़नी लाल

ओढ़नी लाल चुनर के ,
लिपईट लिपईट क अहां साँ,
हम्मर प्यासल नयनन क ,
सदिखन हँसबैत राखैत छल ,
कखनो ऊर्डे वो झकोर हवा संग ,
कखनो समेटी जाई बाहीं में ,
कखनो कान्हा पर ब्याकुल भय ,
ससरैत खसकैत रहेत छल ,
हुनक कान में जाके कखनो किछ
छाती से कखनो सटी जायेत छल ,
हुनक धरकन के गिनी गिनी क ,
ओ उठैत बजरैत रहेएत छल ,
कखनो हुनकर कमरबंद बनी ,
कखनो गाळ क छुबैत छल ,
कखनो पीठ पर जाके बेशरम ,
ससरैत ढलकैत रहेइत छल ,
कखनो ता देखू इ जाजिम बनी क ,
कखनो कोरा में सूती जायेत छल ,
कखनो हुनकर हाथ क इ दुलारे ,
सदिखन हमरा सताबयेत छल ,
एकरा मांथ पर नै रखु अहां ,
अहांक ओढ़नी अछि हम्मर दुश्मन ,
हमरा अहांक बिच आके सदिखन ,
किएक इ बेशरम रहेत छल ,

रूबी झा

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