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जय मिथिला जय मैथिली

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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

बिसरि गेलौं सब किछु लेकिन की बिसरलौं ओ मन अछि
बिसरि गेल छी हुनका लेकिन हुनकर सब बात मन अछि

बितलाहा बात के बिसरि गेनाय ई सभ बुधियारक काज छी
हमहूँ बिसरि गेलौं सब किछु लेकिन बिसरलौं से मन अछि

ओ पहिल मिलन , धारक कात आयल छलीह गुलाबी ड्रेस में
एतबी बिसरलौं और किछु नहिं बिसरलौं बाकी सब मन अछि

हुनकर संग बितायल एक एक पल ओहिना सुना सकय छी
की करी बिसरलाहा के बादो ओहिना सब किछु मन अछि

लाखों करोड़ो नहिं पूरा दुनिया में हुनका चीन्ह सकय छी
हुनकर रुपक ओ छटा कोना बिसरब आई धरि मन अछि

षिकायत छन्हि हुनका जे कहियो हम फोनो नहिं करेत छी
हुनकर देल ओ एयरटेल के नम्बर एखन धरि मन अछि

हुनका ई लागेत छन्हि जे हम हुनका बिसरि गेल छी
हुनका की पता छन्हि हुनकर सब बात हमरा मन अछि

’आशिक ’ की कही अजब अछि अहाँ के आशिकी के दंग
ई त कहू की बिसरलौं , सब किछु त मन अछि

आशिक ’राज ’

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