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जय मिथिला जय मैथिली

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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

निर्मोही

निर्मोही संग जोरल प्रेमक कहानी ,
सनये छि नोर सां प्रेमक पिहानी ,
मौध में बोरी बोरी कहे छलाह .
तखन केहन वो प्रेमक बयना ,
केने सराबोर छथ ओतबे ,,
नोर सां हमर दुनु नयना ,
हाथ में हाथ दय बुझ्बई ,
कोना वो प्रेमक परिभाषा .
हज़ार खंड केलाह आइ वो ,
हमर मोनक सभ आशा ,
मोन में आश छल काटब,
हुनका सघे जीनगानी,
किछु दितऊँ किछु लितऊँ ,
हम हुनका प्रेमक निशानी ,
हुनक स्वभाव रसिक भ्रमर ,
केर होई अछि तहिना ,
रस पिबथी चंपा चमेली ,
खन गुलाब पर तहिना ,
जुनी कहिओ करब बिस्वास ,
पुरुख प्रेम पर ये सहेली ,
कहिओ न सुलझे ऊल्झ्ल
रहे सदिखन ई अछि पहेली
पूरुखक ,प्रेम जेना कागजक नैया ,
भिंजे ता गोबर सुखे ता रूइया

रूबी झा .

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