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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

वासंती गीत



कोइली कुहू -कुहू कुहुके हो रामा वन उपवन में 
नव किसलय सँ गाछ लागल अछि
मंजरि गम -गम गमकि रहल अछि
रंग बिरंगक फुल गाछ में 
प्रकृति कयल श्रृंगार हो रामा वन उपवन में ........
टिकुला सँ अछि झुकि गेल मंजरि 
नेना सब हर्षित अछि घर -घर 
गाछ -गाछ  पर विरहिणी कोइली 
कुहू -कुहू पिया कय बजाबै हो रामा वन उपवन में ....
श्वेतवसन कचनार पहिरी कय 
भ्रमर आंखि केर काजर बनि कय 
कामदेव क लजा रहल अछि
बढ़वय रूप हज़ार हो रामा वन उपवन में .....
महुआ  गम -गम गमकि रहल अछि
नेना चहुँदिसि दौरि रहल अछि
डाली -झोरी मं अछि महुआ 
गाबय चैत बहार हो रामा वन उपवन में ......

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