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जय मिथिला जय मैथिली

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शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

गजल

हमर अहाँक संग भेल
सवय संसार तंग भेल

रहल शराब निसा नहि
एकर कतेक रंग भेल

परल मचान पर छलौं
अपन चुमान संग भेल

अपन पबैत संग छलौं
सगर कपार चंग भेल

भरल एतेक रंग देख
हमर करेज दंग भेल

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१२)
जगदानन्द झा 'मनु'  :  गजल संख्या-१५ 

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