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जय मिथिला जय मैथिली

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शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

गे में कोरा में उठा ले हमरा ,ह्रदय स लगा ले आयल छि तोरा शरण में चरण स लगा ले

गे में कोरा में उठा ले हमरा ,ह्रदय स लगा ले 
आयल छि तोरा शरण में चरण स लगा ले 
गे में ........................................................
हमहू तोरे सखा छि , भाटैकी हम गेल छि 
माया आ लोभ में , सहती हम गेल छि 
गे में अंचार में नुका ले हमरा नयन में समां ले 
गे में ............................................................

माँ नै कुमाता होई छई, हमही कपूत छि 
हमरा विसरी नै ऐना , हमहू तोरे पूत छी
गे में दया तों देखा दे हमरा दुबई स बचा ले 
गे में ............................................................
दस हाथ बाली मैया , कते के बचेलें 
हमरा बेर में जननी नजरी फेर लेलें 
गे में एक बेर फेर अपना करेजा स लगा ले 
गे में .........................................................
डेगे डेगे दुनियां हमरा, ठोकर मरईये
आंखी स नोर झहरे, रोकलो ने जाईए 
गे में टुटल आनंद के तों आश फेर बन्हा दे 
गे में ........................................................
रचना कर आनंद झा 
नोट :कृपया एही कविता के कोनो अंश या कविता हमरा स बिना पूछने उपयोग  नै करी अन्यथा क़ानूनी समाश्या के झेले पारी सके अछि

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