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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

कविता -नव वर्षक पहिल दिन

नव वर्षक पहिल दिन .
देखल जाऊ किछु नवका सीन .
राग-द्वेष के नामोँ नइ अछि .
कहबा लेल आइ केऊ नइ भिन्न .

सबके अपन-अपन अभिलाषा .
केऊ करती आइ छैक क' नशा .
प्रेमि युगल झुमि रहल छै .
इंग्लीस धुन के खुब बजा .
किछु निर्लज्ज एहनो लए आनन्द .
अर्द्धनंग नारी के नचा .
किछु टका उड़ब' मे तल्लीन .
नव वर्षक पहिल दिन . . . . .

साल भैर जे हाल नइ पुछलक .
से कहए hello how are you ?
ई छौड़ी के कमाल कने देखू .
सब मुर्गा सँ बतियाबे नहू-नहू .
अमृत दुध आइ विष बनल .
माछी मारैत दुधवाला बैसल .
किछु समझ नइ आबि रहल .
बिकै मदिरा मांस आ मिन .

नव वर्षक पहिल दिन देखल जाऊ किछु नवका सीन .

कहल गेलै यै जे पहिल दिन खेबै .
से भेटत सालों भैर .
जौं हेतै हलाल पहिल दिन खस्सी .
सालों भैर मरब लैड़-लैड़ .
हेतै पहिल दिन उघार नारी के इज्जत .
त' बहिनक इज्जत सँ के हटायत नजैर .
सोचु किछ अहाँ सब प्रियजन .
ई सब हेतै की नीक हेतै .
मदिरा मांस नीक नइ .
नारी के नचायब नीक नइ .
अहिंसा इज्जत सँ करू .
स्वागत नव वर्ष के .
तोड़ू "अमित" कुंभकरणक नीन्न .
नव वर्षक पहिल दिन देखल जाऊ किछु नवका सीन . , . . . .
राग-द्वेष के नामो नइ अछि . . . .

{अमित मिश्र }

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