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जय मिथिला जय मैथिली

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बुधवार, 25 जनवरी 2012

लाल ठोर कारी केश गोर गाल बबाल करैए


लाल ठोर कारी केश गोर गाल बबाल करैए,
अहांक  नैन कटार, करेजक निहाकरैए

यौवन आयल उफान देखि हिमवानों हेरा गेल,
ओहि स ढलकइत अहाँक ओढ़नी बबाल करैए

अहांक चालिक ठुमका पर आपण हाल की कहु,
ओहि पर चौवन्नी मुस्की सबके बेहाल करैए

अहांक मोहिनी मुख देखिक ते चानो लजा गेल,
ताहि पर जुल्मी तिलबा सजनी कमाल करैए

अहांक आंखिक नशा से  ते “अमित बौराये गेल,
मुदा अहाँ हेबे किनक? सब नजर सबाल करैए 

रचनाकार--अमित मोहन झा
ग्राम- भंडारिसम(वाणेश्वरी स्थान), मनीगाछी, दरभंगा, बिहार, भारत।

नोट..... महाशय एवं महाशया से हमर ई विनम्र निवेदन अछि जे हमर कुनो भी रचना व हमर रचना के कुनो भी अंश के प्रकाशित नहि कैल जाय।

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