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जय मिथिला जय मैथिली

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सोमवार, 23 जनवरी 2012

हमरो जीबऽ दिअ

कोइखेमे छटपटा रहल छी हम
ई दुनियाँ हमरो देखऽ दिअ
बेटी भऽ कऽ जनम लेनहि कोनो अपराध नै
बाबू यौ ई जिनगी हमरो जीबऽ दिअ

डाक्टरक आला कहि रहल अछि
नै बचतहु आब तोहर प्राण
अल्ट्रासाउण्डक रिपोर्ट किछुए कालमे
आब लऽ लेतहु तोहर जान

करेलहुँ अल्ट्रासाउण्ड यौ बाबू
मुँह भेल अहाँक मलीन
डाक्टर संगे केलहुँ ई प्लान
कोइखेमे ऐ बेटीकेँ कऽ दिहक क्लीन

हम बुझैत छी हमरा जनमलाक बाद
नै बाँटब अहाँ जिलेबी बुनिया
दुखित भेल अछि मोन अहाँक / नै आनब
हमरा माए लेल नाक केर नथुनियाँ

जँ होइतहुँ हम बेटा
करितहुँ अहाँ सगरे अनघोल
अड़ोसी-पड़ोसी शुभकामना दितथि
रसगुल्ला बँटितहुँ अहाँ टोले-टोल

बेटीक जनम भेलापर एहेन बेइमानी किएक
आइ किछु हमरो कहऽ दिअ
बेटी भऽ कऽ जनम लेनहि कोनो अपराध नै
बाबू यौ ई जिनगी हमरो जीबऽ दिअ

लेखक - किशन कारीगर

1 टिप्पणी:

  1. बहुत नीक प्रेरक वा सम-समायिक कविता अछि, समाज कए शिख लेबैक हेतु उत्तम |

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