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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

''हास्य कविता ''

फिट -फाट बबुआन बनैत छथ ,
नॉकरी लेल जे पढ़े लिखे छथ ,

ज्यूँ किओ हिनका कह्तेंन नौकर,
लगतेंन इ बात छक द,
हे यौ कहबैन त लगतैन छक द ,

पियोज देखि क आँखी मुने छथ,
लहसुन देखि क मुह बनबई छथ,

सवँसे मुर्गा गिड़े छथ गट द ,
हे यौ कहब त लगतैन छक द ,

मांथ पर बरका पाग बन्हेत छथ ,
दहेज़ प्रथा पर भाषण दये छथ,

अपन जखन बेर अबैई छैन ,
नमरी तहिअबे छथ बक द ,
हे यौ कहबेन त लगतैन छक द ,


[ruby jha]

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