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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

''गर्भ में बेटी ''

तोहर कोइख में ता अछि दुनिया हमर गै माँ ,
तू नै करबें ता करते के हमरा पर दया हमर गै माँ ,

हम ता तोरे छि छांह ,राखो दे एही जग में पाँव ,
अछि मन में लालसा बहुत देखि दुनिया केर रंग ,
रहब तोरे हम संग ,करबैन किनको ना तंग ,

निर्मोही छथि दाई, बाबा, आ बाप ,
कतेक केलो बिनय कतेक केलो बिलाप ,

नै अछि कोनो एही जग में हमर सहारा हे गै माँ ,
तू नै करबें ता करते के हमरा पर दया हे गै माँ ,

जहिया पढ़ब, लिखब पोथी भाईऐ के पढ़ी लेब ,
छोरल भैया के आइंठ खाई हम जीबन जीबी लेब ,

खुजे दे त हमर आँखी एक बेर हे गै माँ ,
करब उजागर नाम हम पुरखा के, हैत नै देर हे गै माँ ,

कनी सोचहिं चिंतित भये हेते ज्यौं केवल बेटा ,
लेती ना जनम बेटी ता ऐ बेटा कतए सां एता ,

स्व स्नेह
'' रूबी झा ''

1 टिप्पणी:

  1. आहां के कविता और रचना सब बहुत नीक लागल ह ऐनाही लिखैत रहूँ

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