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जय मिथिला जय मैथिली

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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

गजल


हम सब पूछी अहाँ सँ एकेटा सवाल, किछ बाजू ने।
अहाँ केलियै किया देशक एहेन हाल, किछ बाजू ने।

आसक धार मे हेलैत मनुक्खक कोनो हेतै कछेर,
आस पूरत, कहियो एतै एहन साल, किछ बाजू ने।

भूखल आँखिक नोर सुखा केँ बनि गेल अछि यौ नून,
वादाक अचार चटा, करब कते ताल, किछ बाजू ने।

कदम ताल करै सँ कतौ देशक भ्रष्टाचार मेटेतै,
गुमस बेसी हेतै त' भ' जैत यौ बवाल, किछ बाजू ने।

राशन होय की शासन अहाँ सभ ठाँ पेंच लगौने छी,
कर जोडि कहै ए "ओम", तोडू इ जंजाल, किछ बाजू ने।
------------------- वर्ण २० ---------------------

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