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जय मिथिला जय मैथिली

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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

‎''बिरह गीत ''

कोन अगुन अपराध हरी जी के ,
केलियन हे ऊधो ........!

ज्यूँ हम रहितऊँ बन के मयुरनी ,
कृष्ण करथि श्रिंगार मुकुट बिच ,
शोभितहूँ हे ऊधो ........!

ज्यूँ हम रहितऊँ ब्येजंत्री के माला ,
कृष्ण पहिरथी हार ह्रदय बिच रहितहूँ ,
हे ऊधो .........!

ज्यूँ हम रहितऊँ वांसक बांसुरी ,
कृष्ण करथि स्वर गान मधुर स्वर ,
बजित्हूँ हे ऊधो .......!

ज्यूँ हम रहितऊँ जल के मछली ,
कृष्ण करथि स्नान चरण हम,
छूबितऊँ हे ऊधो ....!

कोन अगुन अपराध हरी जी के ,
केलियन हे ऊधो .......!!

रूबी झा

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