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जय मिथिला जय मैथिली

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रविवार, 18 दिसंबर 2011

गीत-2

लगबियौन-लगबियौन हिनकर बोली ई, दूल्हा आजुकेँ
हिनकर बड्ड  मोल छैन, ई  तँ दूल्हा आजुकेँ
हिनकर बाबू  बिकेलखिन लाखे, बाबा कए हजारी
लगबियौन मिल जुइल कs बोली ई दूल्हा आजुकेँ

हिनकर गुण छैन बरभारी, ई रखै छथि दूटा बखारी
दरबज्जा पर जोड़ा बडद,रंग जकर छैन कारी
भैर दिन ई पाउज  पान करैत छथि, जेना करे पारी
भोरे उठि  ई लोटा लs कs पीबए जाए छथि तारी

साँझु-पहर चौक पर जेता, चाहीयनि  हिनका सबारी
ई छथि माएक बड्ड -दुलरुआ,हिनका दियौंह एकटा गाड़ी
हिनकर गुण छैन बरभारी ई पिबई छथि खाली तारी
हिनका पहिरs आबै छैन नहि धोती, दियौन जोर भैर सारी

लगबियौन-लगबियौन हिनकर बोली ई,दूल्हा आजुकेँ
हिनकर बर मोल छैन, ई  तँ दूल्हा आजुकेँ

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